ये कौन गीत गाता है।
कौन सर सर करते हुए
पवन का गीत गाता है।
कौन कलकल बहती हुई
नदियों का गीत गाता है।
कौन सुबह किरणे फैलाते हुए
सूरज का गीत गाता है।
कौन रात को चमकाते हुए
चाँद तारों का गीत गाता है।
कौन बाग में खिलती हुई
कलियों का गीत गाता है।
कौन खुशबु फैलाते हुए
फुलों का गीत गाता है।
कौन अंबर से बरसती हुई
वर्षा का गीत गाता है।
कौन हरियाली बिखेरती हुई।
तीज का गीत गाता है।
कौन नई फूल पत्तियां खिलते हुए
बसंत का गीत गाता है।
ये कौन कलम से लिखते हुए।
निर्जीवों को भी सजीव करता है।
ये कौन कल्पना करते हुए
दिल में सजीव चित्रण करता है।
©अनोखी दुनिया
(अर्पणा)
Labels: ये कौन गीत गाता है कविता

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