वो भूल गए।
जो फूल मुस्कुराते थे खिलते हुए
वो आज मुस्कराना भूल गए
जो पक्षी गाते थे बागों में
वो आज गाना भूल गए
जिस राह बहती थी नदियाँ
वो आज बहना भूल गए
जो बादल बरसते थे सावन में
वो आज बरसना भूल गए
यादें कुछ रह गयी बाकी
सब कुछ धूमिल हो गए
जो पल थे प्यारे बचपन के
वो आज हमें मिलना भूल गए
©अनोखी दुनिया
(अर्पणा)
वो आज मुस्कराना भूल गए
जो पक्षी गाते थे बागों में
वो आज गाना भूल गए
जिस राह बहती थी नदियाँ
वो आज बहना भूल गए
जो बादल बरसते थे सावन में
वो आज बरसना भूल गए
यादें कुछ रह गयी बाकी
सब कुछ धूमिल हो गए
जो पल थे प्यारे बचपन के
वो आज हमें मिलना भूल गए
©अनोखी दुनिया
(अर्पणा)
Labels: कविता - वो भूल गए

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