सपने
किसी सपनों में खोया मैं
परिंदा बन उड़ जाता हूँ।
फिर उसी सपनों की
उड़ान से वापिस मैं
जमीं पर आ जाता हूँ।
काश की ये सपनों के
आसमान की जमीं होती।
परिंदा बन उड़ जाता हूँ।
फिर उसी सपनों की
उड़ान से वापिस मैं
जमीं पर आ जाता हूँ।
काश की ये सपनों के
आसमान की जमीं होती।
©अनोखी दुनिया

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