दुनिया का सबसे प्राचीन पुल है रामसेतु।
राम सेतु दुनिया का सबसे प्राचीन पुल है।
कई वामपंथी लोग राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर उनकी कथा कहानियों रामचरितमानस को काल्पनिक बताते हैं लेकिन नासा ने अंतरिक्ष सैटेलाइट से कुछ फोटोग्राफ्स भेजी हैं जिससे रामसेतु पुल के अत्यन्त प्राचीन होने का प्रमाण मिलता है ये लेख महान देशभक्त और क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी के वाख्यान - क्या राम जी काल्पनिक थे? को सुनकर लिखे गए हैं जिसमें यह बताया गया है जो कि बिल्कुल सत्य है इसमें किसी प्रकार का उलटफेर नहीं किया गया है।
आज से कई लाख वर्ष पहले श्री राम जी ने
लंका जाने के पुल बनाया था वो पुल आज भी सुरक्षित है। बस इतना ही अंतर है कि पहले वो समुन्द्र के उपर था ,आज समुन्द्र में नीचे है नीचे कैसे चला गया हो सकता है पिछले कुछ लाख वर्षों में दो चार है हज़ार बार सुनामी आ गया हो। और सुनामी आता है तो मंजिलो मंजिलो बिल्डिंग डूब जाती है तो ये पुल भी डूब गया हो। लेकिन डूबने के बाद भी वो टुटा नहीं है सुरक्षित है और फोटोग्राफ्स बताते हैं और वो साफ दिख रहा है फोटोग्राफ्स बताते हैं जो पत्थर हैं उनको किलों से जोड़ा गया है। और किलें इस मेटल के हैं जो लाखों साल में पानी में रह कर भी क्षरण नहीं हुए कहीं कहीं पत्थर के बीच में चुना लगाया गया है वह साफ दिखता है सीमेंट कहीं नही है क्योंकि सीमेंट था भी नहीं तो चुने और किले से जोड़े हुए पत्थर अभी तक सुरक्षित है टूटे नहीं हैं और उससे भी बड़ी बात ये है कि उस पूरे पुल पर क्रेक नहीं हैं कहीं भी एक क्रेक भी नहीं हैं हम सीमेंट की अच्छी से अच्छी बिल्डिंग बनाते हैं और आरसीसी का लेंटर डालते हैं दो चार साल में ही करेक्स आ जाते हैं।लेकिन उसमें कोई क्रेक भी नहीं हैं। उसकी एक और बड़ी विशेषता है जो पुल है ना वो z शेप में बना हुआ है अभी जो पुल बनते हैं वो सीधी लाइन होती है। एक सीधी रेखा में दीवार खड़ी करते हैं तो डैम (बाँध) बन जाता है।लेकिन वो पुल z शेप का बना है शायद
इसलिये की समुन्द्र के पानी का प्रेशर बहुत होता हो तो उस प्रेशर को इकव्यली डिस्ट्रीब्यूट करना हो तो ये शेप सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें कई दीवार आ जाएंगी। हर दीवार पर प्रेशर डिस्ट्रीब्यूट हो जाएगा तो उसकी लाइफ बढ़ जाएगी। इतनी अक्ल हिंदुस्तान के लोगों को आज से आठ साढ़े आठ लाख साल पहले थी और जानते हैं इस पुल का डिज़ाइनर कौन ? नल और नील यानी
The Great Great Construction Engineer
नल और नील दोनों ने बना दिया पुल और अब नासा कहता है दुनिया को पुल बनाने की तकनीक शायद भारत से गई होगी क्योंकी दुनिया में इसके पहले कोई पुल बना था इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता तो उस पुल पर से जाकर राम की सेना वापस आई। नल और नील और राम का एक सवांद है रघुवंशम है।
नल और नील कह रहे हैं हम पुल बना देंगे आप परेशान मत होइये पत्थर की मदद से बना देंगे। राम पूछ रहे हैं ये समुन्द्र के पानी में पत्थर तैरेंगे कैसे उन्होंने कहा वो आपकी चिंता नहीं है हमारी है
राम ने कहा आपके पास तकनीक क्या है ? तो उन्होंने कहा पहले हम पत्थर को लेके नाव डुबोयेंगे डुबते डुबते वो ऊपर तक आएंगी कंस्ट्रक्शन शुरू करेंगे राम ने कहा कितना दिन लगेगा वे बोले जो लगे सो लगे लेकिन पुल बना देंगे तो राम पूछ रहे हैं ये पुल बनेगा तो जाएंगे तो सही लौट के आएंगे कि नहीं?
तो उन्होंने कहा मैं आपको गारंटी देता हूँ। जो अपनी सेना है वो तो लौट के आएगी पर रावण की सेना इस पर आई तो ये डूब जाएगा। कैसे डूब जाएगा? तो वो कह रहे हैं हमने इसका जो हिसाब निकाला है न पूरा आपकी सेना में सब वानर है और जब वो चलते है ना तो कम प्रेशर डालते हैं।
आपने देखा होगा उनके पंजे भगवान ने कुछ ऐसे बनाये हैं कि उनके पंजे का जमीन पर टिकना बहुत कम दबाव डालता है और वो ऐसे ऊर्जा के मलिक है वानर जैसे ही पंजा टिका तुरंत छलांग लगाते हैं और वे लगातार 1 या 2 किलोमीटर तक जम्प कर सकते हैं वो तो निकल जाएंगे सब के सब। हमने कुछ डिज़ाइन ऐसा रखा है जो रावण की सेना आई तो ये डूब जायेगा। क्यूंकि रावण की सेना में सब राक्षस हैं। और राक्षस शरीर में भारी हैं और भारी होने के साथ दबाव ज़्यादा डालते हैं । तो ये पुल टूट जाएगा और वो मार जाएंगे इसलिए हम विजयी होंगें हारने का कोई चांस नहीं ।
तो ये कितनी क्वालिटी के चीज़ है और ये क्वालिटी की चीज़ किसी देश में आई हो तो मैं मान सकता हूँ उस पुल को बनाने का मैटेरियल उस जमाने में रहा हो और उस पुल को बनाने वाले जो लोग रहे नल ,नील जैसे पता नहीं कितने उनको और भी बहुत कुछ ज्ञान आता हो।
साभार:श्री राजीव दीक्षित जी।
( इतिहास खुद गवाह है । सत्य को कभी जुठलाया नहीं जा सकता।)
कई वामपंथी लोग राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर उनकी कथा कहानियों रामचरितमानस को काल्पनिक बताते हैं लेकिन नासा ने अंतरिक्ष सैटेलाइट से कुछ फोटोग्राफ्स भेजी हैं जिससे रामसेतु पुल के अत्यन्त प्राचीन होने का प्रमाण मिलता है ये लेख महान देशभक्त और क्रांतिकारी श्री राजीव दीक्षित जी के वाख्यान - क्या राम जी काल्पनिक थे? को सुनकर लिखे गए हैं जिसमें यह बताया गया है जो कि बिल्कुल सत्य है इसमें किसी प्रकार का उलटफेर नहीं किया गया है।
लंका जाने के पुल बनाया था वो पुल आज भी सुरक्षित है। बस इतना ही अंतर है कि पहले वो समुन्द्र के उपर था ,आज समुन्द्र में नीचे है नीचे कैसे चला गया हो सकता है पिछले कुछ लाख वर्षों में दो चार है हज़ार बार सुनामी आ गया हो। और सुनामी आता है तो मंजिलो मंजिलो बिल्डिंग डूब जाती है तो ये पुल भी डूब गया हो। लेकिन डूबने के बाद भी वो टुटा नहीं है सुरक्षित है और फोटोग्राफ्स बताते हैं और वो साफ दिख रहा है फोटोग्राफ्स बताते हैं जो पत्थर हैं उनको किलों से जोड़ा गया है। और किलें इस मेटल के हैं जो लाखों साल में पानी में रह कर भी क्षरण नहीं हुए कहीं कहीं पत्थर के बीच में चुना लगाया गया है वह साफ दिखता है सीमेंट कहीं नही है क्योंकि सीमेंट था भी नहीं तो चुने और किले से जोड़े हुए पत्थर अभी तक सुरक्षित है टूटे नहीं हैं और उससे भी बड़ी बात ये है कि उस पूरे पुल पर क्रेक नहीं हैं कहीं भी एक क्रेक भी नहीं हैं हम सीमेंट की अच्छी से अच्छी बिल्डिंग बनाते हैं और आरसीसी का लेंटर डालते हैं दो चार साल में ही करेक्स आ जाते हैं।लेकिन उसमें कोई क्रेक भी नहीं हैं। उसकी एक और बड़ी विशेषता है जो पुल है ना वो z शेप में बना हुआ है अभी जो पुल बनते हैं वो सीधी लाइन होती है। एक सीधी रेखा में दीवार खड़ी करते हैं तो डैम (बाँध) बन जाता है।लेकिन वो पुल z शेप का बना है शायद
इसलिये की समुन्द्र के पानी का प्रेशर बहुत होता हो तो उस प्रेशर को इकव्यली डिस्ट्रीब्यूट करना हो तो ये शेप सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें कई दीवार आ जाएंगी। हर दीवार पर प्रेशर डिस्ट्रीब्यूट हो जाएगा तो उसकी लाइफ बढ़ जाएगी। इतनी अक्ल हिंदुस्तान के लोगों को आज से आठ साढ़े आठ लाख साल पहले थी और जानते हैं इस पुल का डिज़ाइनर कौन ? नल और नील यानी
The Great Great Construction Engineer
नल और नील दोनों ने बना दिया पुल और अब नासा कहता है दुनिया को पुल बनाने की तकनीक शायद भारत से गई होगी क्योंकी दुनिया में इसके पहले कोई पुल बना था इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता तो उस पुल पर से जाकर राम की सेना वापस आई। नल और नील और राम का एक सवांद है रघुवंशम है।
नल और नील कह रहे हैं हम पुल बना देंगे आप परेशान मत होइये पत्थर की मदद से बना देंगे। राम पूछ रहे हैं ये समुन्द्र के पानी में पत्थर तैरेंगे कैसे उन्होंने कहा वो आपकी चिंता नहीं है हमारी है
राम ने कहा आपके पास तकनीक क्या है ? तो उन्होंने कहा पहले हम पत्थर को लेके नाव डुबोयेंगे डुबते डुबते वो ऊपर तक आएंगी कंस्ट्रक्शन शुरू करेंगे राम ने कहा कितना दिन लगेगा वे बोले जो लगे सो लगे लेकिन पुल बना देंगे तो राम पूछ रहे हैं ये पुल बनेगा तो जाएंगे तो सही लौट के आएंगे कि नहीं?
तो उन्होंने कहा मैं आपको गारंटी देता हूँ। जो अपनी सेना है वो तो लौट के आएगी पर रावण की सेना इस पर आई तो ये डूब जाएगा। कैसे डूब जाएगा? तो वो कह रहे हैं हमने इसका जो हिसाब निकाला है न पूरा आपकी सेना में सब वानर है और जब वो चलते है ना तो कम प्रेशर डालते हैं।
आपने देखा होगा उनके पंजे भगवान ने कुछ ऐसे बनाये हैं कि उनके पंजे का जमीन पर टिकना बहुत कम दबाव डालता है और वो ऐसे ऊर्जा के मलिक है वानर जैसे ही पंजा टिका तुरंत छलांग लगाते हैं और वे लगातार 1 या 2 किलोमीटर तक जम्प कर सकते हैं वो तो निकल जाएंगे सब के सब। हमने कुछ डिज़ाइन ऐसा रखा है जो रावण की सेना आई तो ये डूब जायेगा। क्यूंकि रावण की सेना में सब राक्षस हैं। और राक्षस शरीर में भारी हैं और भारी होने के साथ दबाव ज़्यादा डालते हैं । तो ये पुल टूट जाएगा और वो मार जाएंगे इसलिए हम विजयी होंगें हारने का कोई चांस नहीं ।
तो ये कितनी क्वालिटी के चीज़ है और ये क्वालिटी की चीज़ किसी देश में आई हो तो मैं मान सकता हूँ उस पुल को बनाने का मैटेरियल उस जमाने में रहा हो और उस पुल को बनाने वाले जो लोग रहे नल ,नील जैसे पता नहीं कितने उनको और भी बहुत कुछ ज्ञान आता हो।
साभार:श्री राजीव दीक्षित जी।
( इतिहास खुद गवाह है । सत्य को कभी जुठलाया नहीं जा सकता।)
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