खुद को देखा जो मैंने
मंजिल पर कदम रखा जो मैंने
न जाने हम कहाँ खो गए
न जाने किस याद में हम बह गए
याद आता है मुझे
ख्याल तुम्हारा भी
नहीं बैठे हम चुपचाप
बिना कुछ सोचे ही
बस जिंदगी के कुछ
पहेली में खो गए
ना जाने कितना कुछ
कैसे हम खो चले
देखते हैं हम ख़्वाब
हमेशा तेरे साथ का
नहीं सीखा मैंने जीना
बिना हाथ थामे तेरा
ना जाने कब कोई
तूफान मुझे रोक दे
ना जाने कितना कुछ
कैसे तुम बदल चले
थोड़ा शिकवा भी है
और तुमसे शिकायत भी
लेकिन रहोगे तुम खास
इस जिंदगी में मेरी
बनके सूरज से तुम मेरी
जिंदगी में उजाला करते
फिर हम कितना कुछ
कैसे हम भूल जाएं।
©अनोखी दुनिया
मंजिल पर कदम रखा जो मैंने
न जाने हम कहाँ खो गए
न जाने किस याद में हम बह गए
याद आता है मुझे
ख्याल तुम्हारा भी
नहीं बैठे हम चुपचाप
बिना कुछ सोचे ही
बस जिंदगी के कुछ
पहेली में खो गए
ना जाने कितना कुछ
कैसे हम खो चले
देखते हैं हम ख़्वाब
हमेशा तेरे साथ का
नहीं सीखा मैंने जीना
बिना हाथ थामे तेरा
ना जाने कब कोई
तूफान मुझे रोक दे
ना जाने कितना कुछ
कैसे तुम बदल चले
थोड़ा शिकवा भी है
और तुमसे शिकायत भी
लेकिन रहोगे तुम खास
इस जिंदगी में मेरी
बनके सूरज से तुम मेरी
जिंदगी में उजाला करते
फिर हम कितना कुछ
कैसे हम भूल जाएं।
©अनोखी दुनिया

0 Comments:
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home