Sunday, 28 July 2019

पेप्सी कोकाकोला एक जहर

*पेप्सी  बोली  सुन  कोका कोला।*
*भारत का इन्सान है बहुत भोला।।*

*विदेश  से   मैं   आयी  हूँ।*
*साथ में मौत को लायी हूँ।।*

*लहर   नहीं   ज़हर   हूँ  मैं।*
*गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं।।*

*मेरी  पी.एच.  दो पॉइन्ट सात।*
*मुझ में गिरकर गल जायें दाँत।।*

*जिंक  आर्सेनीक  लेड   हूँ  मैं।*
*काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं।।*

*हाँ    दूध     मुझसे    सस्ता    है।*
*फिर पीकर मुझको क्यों मरना है।।*

*540 करोड़ कमाती हूँ।*
*विदेश में  ले  जाती  हूँ।।*

*मैं  पहुँची  हूँ  आज वहाँ पर।*
*पीने को नहीं पानी जहाँ पर।।*

*छोड़ो  नकल   अब  अकल  से जियो।*
*और जो कुछ पीना संभल के ही पियो।।*

* सबको  यह  कविता  सुनाओ।*
*नीबू पानी पिओ सौ साल जिओ।।*


0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home