Sunday, 28 July 2019

पेप्सी कोकाकोला एक जहर

*पेप्सी  बोली  सुन  कोका कोला।*
*भारत का इन्सान है बहुत भोला।।*

*विदेश  से   मैं   आयी  हूँ।*
*साथ में मौत को लायी हूँ।।*

*लहर   नहीं   ज़हर   हूँ  मैं।*
*गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं।।*

*मेरी  पी.एच.  दो पॉइन्ट सात।*
*मुझ में गिरकर गल जायें दाँत।।*

*जिंक  आर्सेनीक  लेड   हूँ  मैं।*
*काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं।।*

*हाँ    दूध     मुझसे    सस्ता    है।*
*फिर पीकर मुझको क्यों मरना है।।*

*540 करोड़ कमाती हूँ।*
*विदेश में  ले  जाती  हूँ।।*

*मैं  पहुँची  हूँ  आज वहाँ पर।*
*पीने को नहीं पानी जहाँ पर।।*

*छोड़ो  नकल   अब  अकल  से जियो।*
*और जो कुछ पीना संभल के ही पियो।।*

* सबको  यह  कविता  सुनाओ।*
*नीबू पानी पिओ सौ साल जिओ।।*


Friday, 26 July 2019

पंक्तियाँ

अब तो स्मार्टफोन ही आजकल
बच्चों को कहानी सुनाने वाली
बन गयी है दादी और नानी
वो भी क्या दौर था जब
बड़े उतावले होते थे बच्चे
कहानी सुनने के लिये
प्यारी सी नींद आंखों में
न जाने कब आ जाती रातों में
जब दादी और नानी सुनाती थी
राजा-रानी, परियों की नई कहानी
पर चला गया है वो उतावलापन
कोई छीन ले गया है बच्चों की
वो प्यारी सी आंखों की नींद
जो अक्सर दादी और नानी के पास
कहानी सुनने के लिए चली आती थी
क्योंकि बच्चों की नानी और दादी
अब स्मार्टफोन बनकर आ गयी है
और बदले में उनके परिवार का अपनापन
और चैन की नींद छीनकर स्मार्टफोन
अपनी कीमत बच्चों से वसूल कर रही है
और उन्हें लुभावनी कहानी सुना रही है।

©अनोखी दुनिया

Wednesday, 24 July 2019

कविता-यूँ ही नहीं आई हूँ।

यूँ ही नही इस धरा पर,
जन्म लेकर आई हूँ।
साथ अपने हर सपने को,
साकार करने आई हूँ।
करना चाहती विचरण स्वच्छंद,
खूले नभ में परिंदो की तरह,
ऊंचाईयों को छूनें आई हूँ।

ज्यों होती कोमल कली
वैसी मैं थोड़ी-थोड़ी
कली की तरह खिलकर मैं,
सूगंध हर तरफ फैलाने आई हूँ।
यूँ ही नही इस धरा पर,
जन्म लेकर आई हूँ।

नई उमंग और नए हौसले,
अरमान जो थी अंदर मेरे,
अपने हर हूनर दिखाकर,
पहचान बनाने आई हूँ।
यूँ ही नहीं इस धरा पर ,
जन्म लेकर आई हूँ।
साथ अपने हर सपने को,
साकार करने आई हूँ।
🌷🌷🌷🌷🌷
©अनोखी दुनिया

Tuesday, 23 July 2019

कविता - क्यों नहीं दिखाई देता

यूँ तो है दुनिया में ,
बहुत कुछ देखने को।
मगर इसे बनाने वाला,
क्यों नहीं दिखाई देता।

आसमां भी है,
जमीं भी है।
मगर इसे संभालने वाला,
क्यों नहीं दिखाई देता।

कभी बादल से बारिश ,
कभी ज्वालामुखी से अग्नि।
मगर इसे उत्पन्न करने वाला,
क्यों नहीं दिखाई देता।

कहीं पर जन्म है,
कहीं पर मरण है।
मगर यह सब करने वाला,
क्यों नहीं दिखाई देता।

क्या दुनिया में वो मौजूद है।
या किसी माया का,
कोई अनूठा रूप है ।
जो भी हो वह मगर,
क्यों नहीं दिखाई देता।

©अनोखी दुनिया

Monday, 22 July 2019

कविताओं की दुनिया

ये कविताओं की दुनिया
आकर्षित करती हैं मुझे
ऐसा लगता है कि
जैसे कोई प्रेमी अपनी
प्रेमिका को आकर्षित करता है
खिंच लाती मुझे अपनी तरफ
ये कविताओं की दुनिया
मेरा दिल भी तो आतुर रहता है
इसे लिखने और पढ़ने के लिए
जितना करीब जाएं इसके
और उतने ही करीब
हम होते चले जाते है
कैसा रिश्ता है ये
मेरा और तुम्हारा
तुम बोलती हो बिना जुबाँ के
और हम जुबाँ के होते हुए भी
लिखते हैं तुम्हें जी भर के
निहारते हैं और मुस्कुराते हैं
तुमसे जब जब मिलते हैं
कभी अपना ख्याल हो
बताना मुझे भी जऱा
ऐ कविता ,
रात बहुत हो गयी
तुम्हें देखते और पढ़ते
चलों सो जातें हैं हम अब
सपनों में मिलने जरूर मुझसे
तुम मिलने आना दुबारा।
🌹🌹🌹🌹
एक कविता प्रेमी की कलम से
©अनोखी दुनिया


Sunday, 21 July 2019

कविता - जमाना बदल गया।

       
पिताजी से पापा
पापा से डैडी
डैडी से ये डैड हो गया।
जमाना बदल गया।
माता जी से मम्मी
मम्मी से मम्मा
मम्मा से मोम हो गया
जमाना बदल गया
प्रणाम से नमस्ते
नमस्ते से हैलो
हैलो से हाय डीयर हो गया
जमाना बदल गया
शर्बत से चाय
चाय से कॉफी
कॉफी से शराब हो गया
जमाना बदल गया।
©अनोखी दुनिया

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Saturday, 20 July 2019

सपने


किसी सपनों में खोया मैं
परिंदा बन उड़ जाता हूँ।
फिर उसी सपनों की
उड़ान से वापिस मैं
जमीं पर आ जाता हूँ।
काश की ये सपनों के
आसमान की जमीं होती।
©अनोखी दुनिया


Thursday, 18 July 2019

भीख मांगने का प्रदुषण।


       
कह दो सब माँगने वालों से-
किस कदर भटक रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
क्या नियत में है तुम्हारी,
कर रहे भीख माँगने की रोजगारी
हाथ पाँव होने के बावजूद,
क्यों निकम्मा बन रहे हो
‌‌हाथो में लिए कटोरा
क्यों भीख मांग रहे हो।
अल्हा ईश्वर का लेते हो नाम,
करते हो भीख मांगने का काम
मज़हब और देश का नाम,
क्यों बद्नाम कर रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
पैसों को तुम बहुत हो लुटाते,
जुआ खेलने, शराब पीने में
ये सब करके तुम,
क्यों कुसंगति फैला रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
फटे पुराने कपड़े डालते हो,
नोटों की गद्दी पर बैठते हो
गरीब लाचार की नोटंकी करके,
क्यों सबको लूट रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
प्रदूषण जल ,ध्वनि ,वायु  तीन,
पर्यावरण में फैले हैं अधिक
लेकिन भीख मांगने का प्रदुषण,
क्यों समाज में फैला रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
बहुत चालक बनते हो भिखारी,
नोटंकी करते सुना अपनी लाचारी
अपने आप परिश्र्म करके ,
क्यों नहीं कमा रहे हो
हाथो में लिए कटोरा,
क्यों भीख मांग रहे हो।
💙✍️
©अनोखी दुनिया
(अर्पणा)

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Wednesday, 17 July 2019

वो भूल गए।

जो फूल मुस्कुराते थे खिलते हुए
वो आज मुस्कराना भूल गए
जो पक्षी गाते थे बागों में
वो आज गाना भूल गए
जिस राह बहती थी नदियाँ
वो आज बहना भूल गए
जो बादल बरसते थे सावन में
वो आज बरसना भूल गए
यादें कुछ रह गयी बाकी
सब कुछ धूमिल हो गए
जो पल थे प्यारे बचपन के
वो आज हमें मिलना भूल गए
©अनोखी दुनिया
(अर्पणा)

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Monday, 15 July 2019

ये कौन गीत गाता है।


कौन सर सर करते हुए
पवन का गीत गाता है।
कौन कलकल बहती हुई
नदियों का गीत गाता है।
कौन सुबह किरणे फैलाते हुए
सूरज का गीत गाता है।
कौन रात को चमकाते हुए
चाँद तारों का गीत गाता है।
कौन बाग में खिलती हुई
कलियों का गीत गाता है।
कौन खुशबु फैलाते हुए
फुलों का गीत गाता है।
कौन अंबर से बरसती हुई
वर्षा का गीत गाता है।
कौन हरियाली बिखेरती हुई।
तीज का गीत गाता है।
कौन नई फूल पत्तियां खिलते हुए
बसंत का गीत गाता है।
ये कौन कलम से लिखते हुए।
निर्जीवों को भी सजीव करता है।
ये कौन कल्पना करते हुए
दिल में सजीव चित्रण करता है।
©अनोखी दुनिया
 (अर्पणा)

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Sunday, 14 July 2019

हास्य स्मार्टफोन चालीसा।


स्मार्टफ़ोन चालीसा

जय स्मार्टफोन ज्ञान का सागर।
जय इंटरनेट के लोक उजागर।
जो कोई  सवाल तुमसे पूछे।
उत्तर देने में विलंब न करते।
तुझ सा नहीं कोई और कृपालु।
गूगल बाबा तुम बड़े दयालु।
सब कोई तुम्हरे ही गुण गावें।
अकेले में तूही साथ निभावे।
टिकट लेन में जब विलंब भई।
जब समय भी कम रह जाई।
झट से तुम्हरी शरण में आवै।
टिकट जल्दी से बुकिंग हो जावै।
अगर कोई बालक ना आवै काबू।
स्मार्टफोन को तूरंत ही करना चालू।
देख इसे बालक शांत होएगा।
हर बात भी आपकी वो मानेगा।
पत्नी से अगर डर अति लागे।
घर में आप चुपके से घुसते।
दे दीजिये उन्हें स्मार्टफोन कोई।
नहीं सवाल वो करेंगी कोई।
चोरों के भी बड़े प्रिय काम के।
हैकिंग से सब के पैसे उड़ाते।
बच के सब थोड़ा इससे रहना।
नहीं तो नुकसान बहुत होएगा।
ज्यादा ध्यान इनका मत करना।
नहीं मिलेगा सुख चैन ज्यादा।
बच्चे भी ना सुनेंगे आपकी।
पत्नी इसमें लीन हो जाएगी।
भले ही है ये बड़े कृपालु।
स्मार्टफोन हर पल ना रखें चालू।
हे बाबा कृपा हम पर करना।
ऐसी आफत ना किसी पर लाना।।
दोहा- 
           जो भी रखें ध्यान मे इन बातों को याद
          संकट सब दूर करें स्मार्टफोन महाराज।।
©(अनोखी दुनिया)
(अर्पणा)









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